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हनुमान जी का विवाह , हनुमान जी की पत्नी का नाम, और भगवान हनुमान का जन्म कब हुवा ?

आइए यहाँ जाने आज हम हनुमान जी का जन्म कब हुवा , हनुमान जी की पत्नी का नाम,एवंम हनुमान जी के विवाह के विषय में जो जानकारी सबसे आधिक सर्च की जाती है उस पर बात करगे !



 ये तो हम सभी अच्छी तरह जानते है की भगवान हनुमान जी  ब्रह्मचारी है  फिर  ये सवाल कहा से  आता है की  हनुमान जी का विवाह किसके साथ हुवा  था ?

आइए जाने इंटरनेट पर सबसे आधिक उत्सुकता और सर्च हनुमान जी के विवाह किसके साथ और कब हुवा इस का जवाब आखिर क्या है जानने की कोशिश करते है

 हनुमान जी का विवाह 

संकट मोचन हनुमान जी के विषय में हम सब को भली भाति ज्ञान है की वे बाल ब्रह्मचारी फिर उनके उनका विवाहिक होने के विषय में कहा जाता है की
जब सूर्य भगवान से अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे थे तब उन्हें 9 विद्या का  ज्ञान लेना था जिसमे से हनुमान जी ने 5 विद्या का ज्ञान तो ले लिया परन्तु बाकि अन्य 4 विद्या के लिए उनका वैवाहिक होना आवश्यक था
कहा  जाता है  इन्ही विद्या के लिए हनुमान  जी ने ब्रह्मचारी होते हुए भी विवाह किया   जिसका मकसद हनुमान जी के लिए  केवल और केवल पूरी की पूरी 9 विद्या में नुपूर्ण होना था !!



हनुमान जी की पत्नी का नाम


कहा जाता है की की ये विवाह सूर्य देव ने  करवाया है  जो की उन्होंने अपनी परम तपस्वी और तेजस्वी पुत्री से करवाया है  हनुमान जी की पत्नी का नाम
सुवर्चला   है


हनुमान जी के विवाह का मंदिर
हनुमान जी के विवाह होने का उल्लेख पराशर संहिता में मिलता है. जिसका की  सबूत  हमे आंध्र प्रदेश के खम्मम ज़िले में बना एक खास मंदिर में भी मिलता है

हनुमान जी का जन्म कब हुवा ?


इसी तरह हनुमान जी के जन्म के विषय में कहा जाता है की हनुमान जी का जन्म अब से करीब  1 करोड़ 85 लाख 58 हजार 112 वर्ष पहले चैत्र पूर्णिमा को हुवा इसी तिथि को हम अब हनुमान जयंती के रूप में मानते है





होली के रंगों को कैसे छुड़ाएं, कैसे रहें सुरक्षित


 होली खेलने से पहले क्या करे जिससे की ना चढ़े होली का रंग ,होली  के रंगों को कैसे छुड़ाएं, कैसे रहें सुरक्षित


हम सब के लिए होली जहा खुशियों और मस्ती के रूप आने वाला एक खास त्यौहार है वही इस त्यौहार के बीत जाने के बाद बारी आती है इन गहरे चटक केमिकल युक्त रंगों को निकालने की  वो  भी बिना अपनी स्किन को ख़राब किये किस तरह से हम होली के रंगों को बड़ी ही आसानी से घर पर प्राकतिक उपायों से होली के रंगों को निकाल भी सकते है और अपनी स्किन को सेफ भी रख सकते है 


आर्गेनिक रंगों के नाम से बाजार में मिलने कई केमिकल  रंग ऐसे है जिनके बारे हम कह नहीं सकते इनके लगने के बाद शरीर से इनका पिछा छुड़ाना  मुश्किल  तो होता ही है साथ ही ये हमारी आँखों, बालो , स्किन ,और नाखुनो के लिए भी उतना ही नुकसान दायक है 
इन रंगों से बचना इसलिए भी मुश्किल है क्योकि हम जिन भी रंगों का इस्तमाल कर रहे ये तो हमे पता है पर हमे ये  नहीं पता की सामने वाला हमे जो रंग लगाने वाला वो आर्गेनिक रंग है या केमिकल  रंग !!

होली के रंगों को कैसे छुड़ाएं

इसका जो सबसे आसान और घरेलू उपाय है वो है बेसन को अच्छी तरह से मलाई में मिला कर उसमे निम्बू के रस के साथ स्क्रब बना कर इस्तमाल करना
इसके अलावा दही भी हमारी स्किन के लिए एक अच्छा क्लीजर की तरह काम करता है इसकी सहायता से  भी  रंग को छुड़ाना बहुत आसान है

 होली खेलने से पहले क्या करे जिससे की ना चढ़े होली का रंग
ये तो बात हुयी होली खेलने के बाद रंग छुड़ाने के घरेलू  नुस्को की !!

अब हम बात करते है ऐसा क्या किया जाए जिससे की होली का रंग ना ही हम पर ज्यादा चढे और ना ही हमे इन नुस्को की जरुवत पढ़े!!


होली खेलने का सबसे अच्छा तरीका है की हम  नेचुरल गुलाल से ही हमेशा होली खेले और मज़बूरी वश अगर  केमिकल युक्त रंगों से होली  खेलना भी पढ़े तो शरीर में अच्छी तरह से तेल की मालिश कर ही  घर से निकले जिससे की होली के रंगों से हमारी त्वचा भी सुरक्षीत रहे और  इन रंगों को निकलने में पानी भी कम से कम बर्बाद हो 

होली कब है 2017 होली की पौराणिक कथा

               होली कब है 2017 होली की पौराणिक कथा

भारतीय हिन्दू त्योहारों में सबसे उत्साह और ख़ुशी  और मस्ती से भरपूर होली का त्यौहार का इंतजार हम सब को बड़ी ही बेसब्री से रहता है आइये तो जाने आखिर कब है होली 2017

  होली कब है 2017 होली की पौराणिक कथा



होली कब है २०१७

इस साल 2017 में  होली  13 मार्च सोमवार  को है  एवंम

12 मार्च को  होलिका दहन  का मुहूर्त- 18:23 से 20:23 तक का है 

होली की पौराणिक कथा :-
होली को मनाये जाने की होली की पौराणिक कथा  
हरिण्यकशिपु और पुत्र प्रह्लाद से जुडी है  जिसमे राजा हरिण्यकशिपु  भगवान विष्णु के वध की आराधना करने वाले अपने पुत्र  प्रह्लाद  को मारने के लिए अपनी बहन होलिका को आग में बैठा देता है परन्तु भगवान की भक्ति की वजह से उनका पुत्र  प्रह्लाद बच जाते है और उनकी बहन होलिका जल जाती है तब से ही होलिका दहन की परम्परा है और यही  होली की पौराणिक कथा   है 
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